Breaking News
Loading...
Sunday, 15 December 2013

Info Post

'कमल’ ’आप’के ’हाथ’ - विडंबन गीत

'आप’ के अडैल रुख पे ’कमल’ जरा मलूल है।
’हाथ’ भी फ़िसल गया तो ’आठ’ की जरूर है॥

खुली खुली ये बात है की उलझा हुआ ये दाव है-२
सोचना ये सोच है की सोच ही पडाव है
अण्णा जिधर गये - २
अण्णा जिधर गये वहॉसे ’लोकपाल’ दूर है
’हाथ’ भी फ़िसल गया तो ’आठ’ की जरूर है॥१॥

झुकी झुकी निगाह में भी है बला की मग्रूरी -२
दबी दबी सी बात मे भी छुपी हुई धुरंधरी
ये पेच दिल्लीका-२
ये पेच

0 comments:

Post a Comment